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मनमर्जी:- समय से स्कूल नहीं पहुंच रहे शिक्षक बच्चों का भविष्य अंधकारमय

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sab ka sapna

अमरोहा/यूपी:- कहते हैं पढ़ोगे लिखोगे तभी तो बनोगे महान। बुजुर्ग कहते हैं बेटा पढ़ ले कहीं नौकरी लग जाएगी अगर बेटा नौकरी नहीं भी लगी तो दुनिया में सब कुछ बट सकता है लेकिन शिक्षा बट नहीं सकती जितना इस ज्ञान को बाटोगे उतना यह ज्ञान बढ़ेगा। लेकिन यह कहावत जनपद के विकासखंड गंगेश्वरी के कुछ विद्यालयों में विपरीत सिद्ध होती है आखिर क्या है ऐसी वजह

देश और प्रदेश भर में सरकार समय-समय पर लगातार शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए नित नए-नए नियम निकलती हैं। रैलिया की जाती है।घर-घर जाकर समझाया जाता है की पढ़ेंगे बच्चे तभी तो आगे बढ़ेंगे। लेकिन सरकार के द्वारा रैली निकालना नए-नए नियम लाना क्या बच्चों के भविष्य को बदलने में कारगर साबित हो रहा है तो जवाब मिलेगा नहीं।आखिर हम ऐसा किस लिए कह रहे हैं तो यह हमें समझने की जरूरत है

गंगेश्वरी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर मैं जब हमारी टीम 9:13 पर पहुंची तो देखा कि वहां बच्चे झाड़ू लगा रहे हैं। विद्यालय के अंदर कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं है। हालांकि पूरे मामले को समझ कर हमारी टीम ने बच्चों से बातचीत की तो बच्चों ने बताया कि हर रोज वह विद्यालय की साफ-सफाई स्वयं करते हैं इतना ही नहीं जो दोपहर को खाना मिलता है खाने के बर्तन भी वह स्वयं ही धुलते है।यह उनकी दिनचर्या का एक हिस्सा है। टीम के द्वारा जब बच्चों से सवाल पूछा गया कि आपके विद्यालय में कितने अध्यापक हैं तब बच्चे कहते हैं कि विद्यालय में चार अध्यापक मौजूद है बच्चों से पूछा जाता है कि अभी शिक्षक कहां पर हैं तो बच्चे कहते हैं कि अभी तक शिक्षक स्कूल में नहीं है हालांकि बच्चे साथ में यह भी कहते हैं की स्कूल की चाबी बच्चों के पास ही रहती है और वह प्रतिदिन विद्यालय को स्वयं खोलकर साफ सफाई करके और पढ़ने के लिए बैठ जाते हैं। उसके बाद हमारी टीम 9:20 पर उच्च प्राथमिक विद्यालय काई सिरसा ऐतवाली पहुंचती है तो वहां का नजारा भी कुछ कम नहीं था। वहां भी विद्यालय में 6 शिक्षक मौजूद हैं लेकिन 9:20 तक विद्यालय में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था यहां पर भी बच्चों से पूछा गया तो बच्चों ने बताया की विद्यालय में 6 शिक्षक हैं लेकिन अभी तक विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं आए हैं। जब स्कूल खोलने के बारे में पूछा गया तो बच्चों ने बताया कि पड़ोस के ही मकान मलिक पर चाबी रहती है। उनसे चाबी लेकर स्कूल को खोल लिया जाता है और हम यहां पर खेलते रहते हैं। अब सवाल उठता है कि स्कूल की चाबी बच्चों के पास रहना या अन्य लोगों के पास रहना यह किस हद तक सही है। सवाल उठता है कि चार शिक्षक और 6 शिक्षक विद्यालयों के अंदर मौजूद होना उसके बाद भी समय से एक भी शिक्षक का विद्यालय में नहीं पहुंचना कहां तक सही है? सवाल उठता है क्या ऐसे शिक्षक बच्चों का भविष्य सुधार पाएंगे?

जब इस विषय में खंड शिक्षा अधिकारी से फ़ोन पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि जॉच कर कार्यवाही की जाएगी।



“जितने वाले कुछ अलग चीज़े नहीं करते बस वो चीज़ो को अलग तरीके से करते हैं !!
“आप तब तक नहीं हार सकतें !

Anuj Goswami

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