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Sambhal N ews:- 15 हजार रुपये से शुरू कर 3.65 लाख का कारोबार खड़ा कर 50 महिलाओं को रोजगार दे रहीं गायत्री देवी

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संभल (सब का सपना):-इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी तरक्की की राह नहीं रोक सकते। इसे सच कर दिखाया है संभल जिले के गुन्नौर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ईशमपुर डांडा गांव की 28 वर्षीय गायत्री देवी ने। हाईस्कूल तक पढ़ीं गायत्री ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) से जुड़कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बदला, बल्कि गांव की करीब 50 अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया।


महज 15 हजार रुपये के रिवाल्विंग फंड से शुरुआत करने वाली गायत्री अब तक सीसीएल और सीआईएफ फंड के जरिए कुल 3.65 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग लेकर कॉस्मेटिक, किराना दुकान और सरकंडे के मूढ़े बनाने का काम सफलतापूर्वक चला रही हैं। आज वे विभिन्न माध्यमों से हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।


वर्ष 2009 में विवाह के बाद गायत्री देवी 2012 में पहली बार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। वर्ष 2019 में उन्होंने नारायण हरी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर समूह सखी के रूप में काम शुरू किया। सबसे पहले उन्हें 15 हजार रुपये का आरएफ फंड मिला। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2021 में एक लाख रुपये की पहली सीसीएल कराई, जिसे समय से चुकाकर वर्ष 2022 में 2.50 लाख रुपये की दूसरी सीसीएल स्वीकृत कराई।
ऋण की मदद से गायत्री ने अपने गांव में खुद की कॉस्मेटिक और किराना दुकान खोली। इसके बाद उन्होंने गांव के समूहों को जोड़कर सीआईएफ के सहयोग से सरकंडे के पारंपरिक मूढ़े बनाने का काम बड़े स्तर पर शुरू किया। आज उनके साथ लगभग 50 महिलाएं इस कार्य में लगी हुई हैं। मूढ़ा निर्माण और बिक्री से ही समूह को हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जबकि दुकानों की आय मिलाकर गायत्री प्रतिमाह 30 हजार रुपये तक कमा लेती हैं।


प्रशासन की ओर से आयोजित प्रदर्शनियों में भी गायत्री अपने उत्पादों के स्टॉल लगा चुकी हैं। वे संभल के बहजोई, चंदौसी और गुन्नौर में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में अपने समूह के मूढ़े और हस्तशिल्प उत्पा

द लेकर पहुंचीं। गायत्री का कहना है कि घर से बाहर कदम रखने पर आत्मविश्वास बढ़ा और योजनाओं की जानकारी हासिल हुई।
गायत्री देवी अपने इस उद्यम को और बड़े मुकाम पर ले जाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि गांव के पास एक बड़ी उत्पादन यूनिट स्थापित हो, जिससे क्षेत्र की सैकड़ों अन्य महिलाओं को नियमित रोजगार मिल सके।


अधिकारियों के अनुसार गायत्री देवी द्वारा स्वयं सहायता समूह के जरिए हासिल किया गया यह मुकाम अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है। जिला प्रशासन ऐसे हुनरमंद समूहों को बैंक लिंकेज, बाजार और प्रदर्शनियों के माध्यम से लगातार प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है।

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