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कलयुग में सतयुग का आनंद लेना है तो चले जाओ इस गांव
हिंदू धर्म के भगवान की श्रेष्ठता होने का प्रतीक है यह गांव
अक्सर आपने पढ़ा होगा सुना होगा कि पहले सतयुग में कहीं भी आज की तरह मशीनरी युग नहीं था। सब लोग बड़ी हंसी खुशी के साथ रहते थे। पक्के मकान नहीं थे। झोपड़ी और कच्चे घर हुआ करते थे, लेकिन उसके बाद भी लोग वहां पर खुश थे। आज कलयुग का दौर है मशीनरी युग है। मशीनरी युग में आज भी एक ऐसा गांव है जहां आप अगर घूमने के लिए जाते हैं तो आपको ऐसा लगेगा जैसे कि आप कलयुग में नहीं बल्कि सतयुग में पहुंच गए। वहां पर आपको साधु संत घूमते हुए मिल जाएंगे। साधु संत ध्यान में लीन मिलेंगे तपस्या करते हुए भी आपको साधु संत वहां पर मिल जाएंगे। उस जगह पर महिला बगैर सर पर कपडा रखे आपको नहीं मिल सकती।
उस जगह अगर महिला जाएगी तो उसको सर पर कपड़ा रखना ही पड़ेगा। मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक वहां यानी की मशीनरी सामान का पूर्णता वहां पर प्रतिबंध है। वहां पर मशीनरी का प्रयोग नहीं होता। उस गांव में आज भी कुएं से पानी निकाल कर पिया जाता है। आज भी जब लोग उसे गांव के बारे में सुनते हैं तो चौंक जाते हैं। कहते हैं ऐसा संभव नहीं है हालांकि यहां पर आपको बता दें कि उस गांव के बारे में कुछ चंद लोग ही जानते हैं। आजकल वह गांव सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। तो बगैर देरी किए हम आपको ले चलते हैं उसी गांव में।
नहीं देखने के लिए मिलेगा मशीनरी युग
आपने मथुरा का नाम तो सुना ही होगा वह मथुरा जहां श्री कृष्ण जन्म स्थान है। श्री कृष्ण जी की भक्ति में लीन साधु संत आपको मथुरा वृंदावन में घूमते हुए मिल जाएगै ।वह मथुरा वृंदावन जहां आज लाखों की तादाद में हर रोज दर्शन करने के लिए दर्शनार्थी पहुंचते हैं और बांके बिहारी जी को निहारते हैं। मथुरा का ही एक गांव है। गांव का नाम है टटिया गांव। टटिया गांव आज भी सुविधाओं से परे है। वहां पर आपको बिजली नहीं मिलेगी,मोबाइल का प्रबंध है, मशीनरी का प्रबंध है। जब आप टटिया गांव में पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप सतयुग में पहुंच गए हैं।
तपस्या में लीन मिल जाएंगे साधु संत
वहां पर आपको पेड़ पौधे पक्षी मिल जाएंगे।साधु संत आपको वहां पर ध्यान में मगन दिखाई देंगे। आज भी टटिया गांव में जैसे लोग सतयुग में रहते थे वैसे ही वहां पर आज भी रहते हैं। जब आप टटिया गांव में पहुंचेंगे तो वहां पर बहुत सुकून और शांत भरा जीवन देखने के लिए मिलेगा टटिया स्थान में वाकई एक वास्तविकता है कि जब आप वहां पर पहुंचते हैं तो आपको ऐसे लगता है जैसे आप हजारों वर्ष पहले चले गए हैं प्रकृति के साथ आपको घनिष्ठ संबंध वहां पर देखने के लिए मिल जाता है। पवित्रता और दिव्यता और आधुनिकता का वह स्थान है। मानव प्रकृति के साथ-साथ होने के बाद टटिया स्थान एक करीबी रिश्तों की भी आपको याद दिलाएगा। अगर यह कहा जाए कि हिंदू धर्म के भगवान की श्रेष्ठता होने का आपको देखना है। तो टटिया गांव सबसे अच्छा उदाहरण है।
यह स्थान स्वामी हरिदास संप्रदाय से जुड़ा हुआ है।
साथ ही आपको बता दें कि टटिया स्थान की विशेषता यह है कि आज भी वहां आधुनिक वस्तु इलेक्ट्रॉनिक सामान का उपयोग नहीं किया जाता वहां पर पंखा, बल्ब जैसे मामूली साधन भी देखने को आपको नहीं मिलेंगे। आरती के समय बिहारी जी को पंखा आज भी पुराने समय के जैसे डोरी की सहायता से करते हैं। यह एक ऐसा स्थल है जहां के हर वृक्ष और पत्ती में भक्तों ने राधा कृष्ण की अनुभूति की है। संत कृपा से राधा नाम पत्तियों पर उभरा हुआ देखा है। आरती गायन भी इतना भिन्न है कि शायद आपको एक भी शब्द समझ नहीं आएगा, पर सुनने में शायद बहुत ही आनंद आपको मिलेI अगर आप भी अभी तक मथुरा जाते हैं और टटिया गांव नहीं पहुंचे तो आपको टटिया गांव जाकर सतयुग का आनंद लेना चाहिए। यानी कि इस कलयुग से परे हटकर आपको कुछ पल या यू कहे कि कुछ समय वहां पर गुजारना चाहिए।
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