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लड़के ने नम्बर मांगा आप ने दे दिया…लड़के ने तस्वीर मांगी आप ने दे दी…लड़के ने वीडियो कॉल के लिए कहा आप ने कर ली…लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा आप ने हटा दिया…
लड़के ने नम्बर मांगा आप ने दे दिया…लड़के ने तस्वीर मांगी आप ने दे दी…लड़के ने वीडियो कॉल के लिए कहा आप ने कर ली…लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा आप ने हटा दिया…लड़के ने कुछ देखने की ख्वाहिश की आप ने पूरी कर दी…लड़के ने मिलने को कहा आप माता पिता को धोखा देकर कथित प्रेमी से मिलने पहुंच गयीं…लड़के ने बाग में बैठ कर आप की तारीफ़ करते हुए आपको सब्ज बाग दिखाए आपने देख लिये…फिर जूस कार्नर पर जूस पीते वक़्त लड़के ने हाथ लगाया, इशारे किये, मगर कोई बात नहीं, आप को कोई अंतर नहीं पड़ा ,
अब नया ज़माना है यह सब तो चलता ही रहता है…फिर लड़के ने होटल में कमरा लेने की बात की, आप ने शर्माते हुए इंकार कर दिया, कि शादी से पहले यह सब अच्छा तो नहीं लगता न…फिर दो तीन बार कहने पर आप तैयार हो गयीं होटल के कमरे में जाने के लिए…आप दोनों ने मिल कर खूब एंजॉय किया…अंडरस्टेंडिंग के नाम पर दुल्हा दुल्हन बन गए प्रोटेक्शन यूज कि बस बच्चा पैदा न हो इस पर ध्यान दिया…फिर एक दिन झगड़ा हुआ और सब खत्म क्योंकि अवैध रिश्तों का अंजाम कुछ ऐसा ही होता है…
लेकिन—- लेकिन…यहां सरासर मर्द गलत नहीं है, वह भेड़िया है, वह मुजरिम है, वह सबकुछ है…क्योंकि आप ने तो तस्वीर नहीं दी थी वह जबर्दस्ती आपके मोबाइल में घुस कर ले गया था…आप ने तो अपना नम्बर नहीं दिया वह लड़का खुद आप के मोबाइल से नम्बर ले गया था…आप ने तो वीडियो कॉल नहीं की वह लड़का खुद आप के घर पहुंच गया था आपको लाइव देखने…जूस कार्नर पर भी जबरदस्ती ले गया था गन प्वाइंट पर नहीं–होटल के कमरे तक भी वह आपको जबर्दस्ती आपके घर से ले गया था?तो मुजरिम तो सिर्फ लड़का है आप तो बिल्कुल भी नहीं…बच्ची हैं आप कोई चार साल की?आपको समझ नहीं आती?यह कचरे में पड़ी लाशें देख कर भी आपको अक़्ल नहीं आती?
यह बिना सर के मिलने वाले युवतियों के धड़ आपकी अक़्ल पर कोई चोट नहीं करते ?यह सोशल मीडिया पर आए दिन ज़्यादती के बढ़ती हुई घटनायें आपको कुछ नहीं बताती?जूस कार्नर पर जाना,आपको नहीं पता था कि एक होटल के कमरे में या चारदीवारी में जिस्मों की प्यास बुझाई जाती है,सब पता था आपको, सब पता है आपको क्या होने वाला है.होटल के कमरे में मुहब्बत के अफसाने नहीं लिखे जाते, भजन कीर्तन और धार्मिक भाषण नहीं होता है ,वहां कोई इबादत या क़ुरान हदीस नही पढ़ी है .
फिर शिकायत होती है के चार लड़कों ने गेंगरेप कर दिया.. हत्या करके नाले में फ़ेंक दिया ?.क्या लगता है वह आपका जो आपकी इज्ज़त का ख्याल रखेगा जो खुद आपको इसी मकसद के लिए लेकर जा रहा है?अपनी सीमा में रहेंगी तो आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता…जिस्म के भूखो से दूर ही रहें लड़का हो या लड़की प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम ना करे प्यार दिल देखकर करे ना कि जिस्म देखकर !
जब तक तुम साथ नही दोगी तब तक किसी लड़के की कोई औकात नही हैं कि वो तुम्हे किसी होटल के रूम तक ले जा सके। सब बेटियों से अनुरोध है झूठे प्यार से अपने माता पिता और समाज का ध्यान रखें जीवन बहुत अनमोल है। इस की रक्षा करे ।
जहाँ तक आजकल पवित्र रिश्तों को तार तार होने की बात है तो शादी शुदा महिलाएं भी कम नहीं हैं कोई जमाई के साथ, कोई चाचा के साथ ,कोई फूफा के साथ कोई सगे भाई और पिता के साथ,कोई दादी के साथ और कोई मामी चाची के साथ विवाह कर के नया इतिहास रचा जा रहा है उनके साथ अवैध संबंद बना रहा है कोई धर्म परिवर्तन कर के स्वम् को आधुनिक बता रहा है कोई घर वापसी कर रहा है तो तो कोई घर छोड़ कर जा रहा है , एक शादी शुदा स्त्री जब किसी अन्य पुरुष से मिलती है ,
उसे जाने अनजाने अपना दोस्त बनाती हैं ,वह जानती है कि न तो वह उसकी हो सकती हैं और न ही वह उसका हो सकता है ,उसे वह पा भी नहीं सकती और खोना भी नहीं चाहती ,फिर भी वह इस अनजान रिश्ते को वह अपने मन की अत्यंत संवेदन शील डोर से बांध लेती है,तो क्या वह इस समाज के नियमों को नहीं मानती?क्या वह अपनी नैतिक समाजिक और धार्मिक सीमा को नहीं जानती ?
जी नहीं वह समाज के सभी नियमों को भी मानती है,और अपनी सभी सीमाओं की दहलीज को भी जानती है,परन्तु कुछ पल के लिए वो अपनी जिम्मेदारी भूल जाना चाहती है,जीने की एक रूपता से घुटन महसूस करने लगती है,कुछ खट्टा..कुछ मीठा,,आपस में बांटना चाहती है,जो शायद कही और किसी के पास नही बांटा जा सकता है वह उस व्यक्ति से कुछ एहसास बांटना चाहती है,
जो उसके मन के भीतर ही रह गए है कई सालों से गुम शूम हो जाते हैं ,थोडा हँसना चाहती है,खिलखिलाना चाहती हैं वह चाहती है की कोई उसे भी समझे बिना कहे,सारा दिन सबकी फिक्र करने वाली स्त्री चाहती है कि कोई उसकी भी फिक्र करे…वह केवल अपने मन की बात कहना चाहती है,जो रिश्तो और जिम्मेदारी की डोर से आजाद हो ,कुछ पल बिताना चाहती है,जिसमे न दूध उबलने की चिंता हो,न राशन का जिक्र हो….न इ एम आई की कोई तारीख का झंझट हो,आज क्या बनाना है,ना इस की कोई तैयारी हो,बस कुछ ऐसे ही मन की दो बातें करना चाहती है,
कभी उल्टी सीधी बिना सिर पैर की बातें !तो कभी छोटी सी हंसी और कुछ पल की खुशी…बस इतना ही तो चाहती है,आज शायद हर कोई इस रिश्ते से मुक्त एक दोस्त ढूंढता है,जो जिम्मेदारी से मुक्त हो.आज यही कारण हैं जिस के परिणाम स्वरुप जहां बेटियां भावनाओं में बह रही हैं तो दूसरी ओर शादी शुदा स्त्रियां भी पथ भ्रष्ट हो रही हैं इस के लिए विशेष रूप से माता पिता के साथ -साथ शादीशुदा पुरुषों को अपनी जीवन संगिनी की भावनाओं को समझने की आवश्यकता है,
उन्हें समय देने उनके साथ मित्रों जैसा व्यवहार करने के लिए सप्ताह में एक दिन अवश्य आरक्षित रखें ताकि परिवार में सुख शांति और रिश्तों की पवित्रता बनी रहे अन्यथा जिस प्रकार का नैतिक पतन हो रहा है आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।अपनी बेटियों की भावनाओ को समझें उनको आज़ादी तो दें परन्तु उनकी सीमाओं का निर्धारण और समय पर उनके विवाह की चिंता गंभीरता से करें ताकि हमारे समाज में बढ़ती बुराइयों को रोका जा सके। डा. महताब अमरोहवी प्रवक्ता (पत्रकारिता ) नायाब अब्बासी डिग्री कालिज अमरोहा
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