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बढ़ापुर वन रेंज में पुष्पा स्टाइल में अवैध कटान को लेकर उठे सवाल

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बढ़ापुर/बिजनौर(सब का सपना):- नजीबाबाद वन प्रभाग की बढ़ापुर वन रेंज में आरक्षित वन क्षेत्र से पेड़ों के अवैध कटान को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और सूत्रों का कहना है कि जंगल से फिल्म पुष्पा स्टाइल में लकड़ी की चोरी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन बढ़ापुर के पुष्पा पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। इससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बढ़ापुर रेंज के अंतर्गत मौजा गंगारामवाला के कक्ष संख्या-9 में हाल ही में दो सागौन के पेड़ कटे पाए गए।

इस संबंध में जब रेंज स्तर पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो रेंजर ने इसे बीट कर्मचारियों से जुड़ा मामला बताते हुए स्वयं को प्रत्यक्ष जानकारी से अलग बताया। उनका कहना था कि विस्तृत वन क्षेत्र की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है और यदि चोरी-छिपे कटान होता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित फील्ड स्टाफ की होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय जंगल से शीशम, सागौन और खैर जैसी मूल्यवान लकड़ियों का अवैध परिवहन घोड़ा-बुग्गी और अन्य साधनों से किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

वन विभाग की ओर से आमतौर पर ऐसे मामलों में जांच कर नियमानुसार कार्रवाई और जुर्माने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि निगरानी और सतर्कता और मजबूत नहीं की गई तो आरक्षित वन क्षेत्र को दीर्घकालीन नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और वन संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग की है। डीएफओ नजीबाबाद अभिनव राज का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है मामले की जांच पर कार्रवाई की जाएगी ।

पुष्पा’ स्टाइल मे हो रही थी बढापुर से खैर की लकडीं की तस्करी

फिल्म ‘पुष्पा’ को कॉपी करने की कोशिश करने वाले लकड़ी तस्करों की स्कॉर्पियों थाना शेरकोट के हरेवली के पास रामगंगा बैराज के जलाशय में गिरी तो तस्करी का खुलासा हुआ । दरअसल इस स्कॉर्पियों में खैर की लकड़ी भरी हुई थी। जोकि प्रतिबंधित है।गाडीं पानी मे गिरने के बाद तस्कर गाड़ी के शीशे तोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने खैर की लकड़ी से लदी गाड़ी को क्रेन के जरिए निकलवाकर कब्जे में लिया ।बढापुर में वनों की अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूज यहां कटाई और तस्करी, दोनों जारी हैं। हालांकि समय-समय पर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में विभाग को सफलता मिलती रही है। उसके बाद भी लकड़ी तस्करों के हौसले बुलंद है।

लकड़ी काटने के सवाल पर तिलमिला उठे रेंजर साहब

बढ़ापुर रेंज में लकड़ी तस्करों द्वारा काटे जा रहे पेड़ों के मामले में एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर रेंजर साहब की जो प्रतिक्रिया सामने आई है उसने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल के जवाब में रेंजर की ओर से यह कहा जाना कि वन क्षेत्र बहुत विस्तृत है और उसकी हर गतिविधि पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर पाना संभव नहीं है। उनका यह भी कहना है कि यदि कोई व्यक्ति चोरी-छिपे पेड़ काटकर ले जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर रेंज अधिकारी पर नहीं डाली जा सकती। विभागीय हलकों में इस तरह की प्रतिक्रिया को निगरानी तंत्र की सीमाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

जानकारी के दौरान रेंजर की ओर से यह कहा जाना कि वह केवल इसी कार्य के लिए वह नहीं बैठे हैं और कटान संबंधी जानकारी बीट स्तर से ली जानी चाहिए। यह जवाब विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर सवाल खड़े करता है की अगर वन संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग के अधिकारियों की नहीं है तो किसकी है ? लकड़ी तस्करों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी किसकी है ? वन संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि तैनाती के समय अधिकारियों को वनों की रक्षा की जो शपथ दिलाई जाती है, उसकी भावना व्यवहार में भी दिखनी चाहिए।

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