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रहरा और मटीपुरा मे स्वास्थ्य सेवा राम भरोसे, कैसे हो मरीजों का उद्धार
प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है सरकार लगातार प्रयासरत है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाए। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर भारत संकल्प यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। गांव, गांव घर-घर जाकर यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि सरकारी सेवाओं का लाभ लीजिए सरकार द्वारा इतनी योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या आम आदमी को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। तो जवाब मिलेगा नही।
जब हमारी टीम ने दिन शनिवार को अमरोहा जनपद के तहसील हसनपुर के विकासखंड गंगेश्वरी की स्वास्थ्य सेवाओं को समझने के लिए क्षेत्र का दौरा किया। तो पड़ताल में सामने आया कि मटीपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दस बजकर बाईस मिनट पर गेट पर ताला लटका हुआ मिला।

उसके बाद जब हमारी टीम ग्यारह बजे रहरा सीएचसी केंद्र पहुंची तो वहां पर केंद्र प्रभारी के ऑफिस में ताला लटका मिला एक-एक बेड पर दो-दो मरीज नजर आए।
रहरा सीएचसी में समय से नहीं पहुंच रहे डॉक्टर, करते रहते हैं मरीज डॉक्टरों का इंतजार
रहरा/अमरोहा (सब का सपना) :- जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद भी रहरा सीएचसी में डॉक्टर का समय पर न पहुंचना चिंतनीय विषय है। हाल ही में रहरा सीएचसी का जिलाधिकारी के द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। लेकिन उसके बाद भी लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ भी सुधार नजर नहीं आ रहा। लगातार डॉक्टर का नदारद रहना अपने आप में चिंता का विषय है।
शनिवार को जब हमारी टीम 11:00 बजे के आसपास सीएचसी रहरा पहुंची तो देखा की मरीज बेड पर पड़े हैं और दर्द से कराह रहे हैं। जब बेड पर लेट रही महिला मरीज से जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि वह यहां 1 घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं हालांकि एक डॉक्टर साहब आए थे, उन्होंने एक इंजेक्शन लगा दिया था। उसके बाद से किसी ने भी इधर का रुख नहीं किया है। उसके बाद जब हमारी टीम ने अस्पताल के प्रबंधन को समझने के लिए अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर सतीश भास्कर के कमरे का रुख किया तो देखा कि वहां तो ताला लटक रहा है।

जब टीम ने अस्पताल के सभी कमरों में जा कर देखा तो पता चला कि डॉक्टर शशांक चौधरी ही केवल अपने कमरे में तैनात मरीजों का पर्चा लिखते नजर आए।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि जिलाधिकारी के द्वारा आकस्मिक निरंक्षण करने के बाद भी रहरा अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर भास्कर व डॉक्टर सौरभ त्यागी को शायद ही जिला अधिकारी का डर हो। मानो देखकर लगता है कि सरकारी अस्पताल सरकारी नहीं, बल्कि यह तो प्राइवेट हो चला है। डॉक्टरों की जब इच्छा होगी तब वह डॉक्टर अस्पताल में जाकर बैठेंगे। नहीं तो अस्पताल राम भरोसे चलता रहेगा। अब ऐसे में सवाल उठता है कि दूर दराज से आए हुए मरीजों का आखिर क्या होगा।
एक डॉक्टर लगातार 8 वर्षों से एक ही जगह पर मौजूद कैसे?
बताया जाता है कि डॉक्टर सौरभ त्यागी पहले सीएचसी प्रभारी हुआ करते थे। अभी फिलहाल डॉक्टर के पद पर तैनात हैं। सौरभ त्यागी लगातार सात , आठ वर्षों से रहरा सीएचसी में ही तैनात है। तब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वह एक ही स्थान पर सात , आठ वर्षों से किसके संरक्षण में रहकर ड्यूटी कर रहे हैं। हालांकि कुछ दिन पहले भारतीय किसान यूनियन के द्वारा भी इन्हें पद से हटाने की व ट्रांसफर की मांग की गई थी।
उसके बाद भी डॉक्टर सौरभ त्यागी पर कोई कार्यवाही का ना होना स्वास्थ्य विभाग की कार्य शैली पर सवाल उठाता है।
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