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Sambhal news

सम्भल वन प्रभाग में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सफल प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

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चन्दौसी/संभल(सब का सपना):- मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सम्भल वन प्रभाग में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रभागीय कार्यालय कैम्प चन्दौसी के परिसर में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में फील्ड स्टाफ को रेस्क्यू ऑपरेशनों के बारीकियां सिखाई गईं, ताकि हिंसक वन्यजीवों से जुड़े खतरे न्यूनतम हो सकें।कार्यशाला का संचालन क्षेत्रीय वन अधिकारी मनोज कुमार ने किया, जो सम्भल-चन्दौसी रेंज के प्रभारी हैं।

उन्होंने प्रभाग के सभी फील्ड स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन तथा वन्यजीव रेस्क्यू ऑपरेशनों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में प्रभाग के समस्त फील्ड व कार्यालयीन स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो वन संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेष रूप से तेन्दुआ, बाघ और अन्य हिंसक वन्यजीवों के रेस्क्यू पर फोकस किया गया। मनोज कुमार ने बताया कि ऐसे ऑपरेशनों में सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत कदम से न केवल स्टाफ या स्थानीय लोगों को खतरा हो सकता है, बल्कि रेस्क्यू किए गए जीव को भी नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने रेस्क्यू के दौरान अपनाई जाने वाली प्रमुख सावधानियों पर प्रकाश डाला, जैसे कि क्षेत्र की टोह लेना, टीम वर्क और त्वरित निर्णय लेना।कार्यशाला में रेस्क्यू के लिए उपयोगी उपकरणों—जैसे कैज, जाल, हेलमेट, जैकेट, दस्ताने, ट्रेप आईआर कैमरा और माइक—के सही उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मनोज कुमार ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से समझाया कि इन उपकरणों का कैसे प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाए, ताकि ऑपरेशन के दौरान किसी को चोट न लगे। उन्होंने जोर दिया कि रेस्क्यू के बाद वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से उच्चाधिकारियों, पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनके प्राकृतिक आवास, बचाव केंद्र या चिड़िया घर भेजा जाना चाहिए।

यह प्रशिक्षण न केवल फील्ड स्टाफ की क्षमता वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सम्भल जिले जैसे क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे निरंतर कार्यक्रमों से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक बदलाव आएगा। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे प्राप्त ज्ञान को जमीन पर उतारेंगे।

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