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बाल शिक्षा पर आधारित फिल्म सूर्या का प्रीमियम संपन्न

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भोपाल ( गिरजा शंकर अग्रवाल ) – आज भोपाल के आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन के बैनर तले शार्ट फिल्म शौर्य का विधिवत प्रीमीयर सम्पन्न हुआ। इस फिल्म की निर्माता डॉ मीनू पांडेय हैं। निर्देशक डॉ प्रभात पांडेय और कैमरा निर्देशन और संपादन डायरेक्टर मुनीर रजा ने किया है। फिल्म बाल शिक्षा पर आधारित हैं जिसमें एक बच्चे शौर्य की कहानी जो भी पढाई पर ज्यादा ध्यान ना देकर अन्य गतिविधियों जैसे टीवी देखना मोबाइल चलाना आदि पर ज्यादा ध्यान देता है इस कारण उसकी मां लगातार उसे पढ़ने पर ध्यान देने को कहती हैं लेकिन शौर्य ड्राइंग अच्छी बनाता है पर उसकी मां उसे टीवी कंप्यूटर से दूर रखकर हमेशा पढाई करने के लिए कहती रहती है!

इसकी शिकायत शौर्य अपने पापा से करता है पर उसके पापा भी ज्यादा ध्यान नहीं देते और इस कारण शौर्य अंदर ही अंदर परेशान रहने लगता है एक दिन उसकी बुआ जो बैंगलोर में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं आती है शौर्य अपनी बुआ और ताऊजी का ज्यादा लाड़ला है बुआ उसके लिए टेब लाती है और शौर्य को देती है इस पर मां बिगड़ जाती है और बुआ से बोलती है श्रद्धा तुम शौर्य को बिगाड़ रही है इस बीच शौर्य के ताऊ जी आते हैं और श्रद्धा को बताते हैं शौर्य बहुत अच्छी पैंटिग करता है और शौर्य को बुआ को पैटिंग दिखाने को बोलते हैं शौर्य पैंटिग लेने अपने कमरे में चला जाता है इस बीच श्रद्धा शौर्य की मां को एक कहानी के माध्यम से बताती हैं आज प्रत्येक क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध है जरूरी नहीं हर बच्चा डाक्टर इंजीनियर ही बने बच्चे की जिस क्षेत्र में रुचि है उसको पहचानते उसी क्षेत्र में उसे आगे बढ़ने देना चाहि!

आज बच्चे कलाकार लेखक टेक्नीशियन शिक्षक लाइब्रेरी पत्रकारिता संगीत नृत्य ड्रामा आदि अनन्य क्षेत्रों में केरियर बना सकते हैं इस बीच शौर्य अपनी पेंटिंग ले आता है और बुआ को दिखाता है बुआ शौर्य को मां को दिखाती है और कहती हैं देखिए भाभी शौर्य कितनी अच्छी पैंटिग करता है मां कहती हैं मैंने आज तक नहीं देखी वो कहती हैं सच श्रद्धा तुमने मेरी आंखें खोल दी फिर श्रद्धा शौर्य को कहती हैं पैंटिग के साथ पढाई भी जरूरी है इस तरह फिल्म एक संदेश कि बच्चों का टेलेंट पहचान कर उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने दें उन पर पढाई के लिए दबाव नहीं बनाएं अन्यथा परिणीती भयानक हो सकती है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। विषय का चित्रण बेहतरीन ढंग से किया गया है। 4 कलाकरों और एक दर्जन टैक्नीकल टीम के सदस्यों के साथ निर्मित 15 मिनट की यह शार्ट फिल्म डा‌ प्रभात पांडेय की कहानी पर आधारित है जिसकी पटकथा इं अंशुल कुकरेले और डॉ प्रभात पांडेय ने तैयार की है। फिल्म का कैमरा निर्देशन और संपादन अनुभवी मुनीर रजा कर रहें हैं।

कलाकारों की फेहरिस्त में मुख्य भूमीकाओं में डॉ. प्रभात पांडे, मनोज रावत, पूर्वा शर्मा त्रिवेदी, श्रद्धा जोशी एवं शौर्यादित्य हैं। फिल्म का खूबसूरत गीत शैली जैन ने लिखा है जिसे आर्यादित्य ने अपनी आवाज दी है सभी कलाकारों का अभिनय भूमिका के अनुरूप है इस फिल्म में पुलिस अधिकारी श्रद्धा जोशी ने अभिनय कर सिद्ध किया है कि वो बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं साथ ही दूरदर्शन और आकाशवाणी की प्रस्तुतकर्ता एंकर पूर्वा त्रिवेदी ने अपने अभिनय से छाप छोड़ी है।फिल्म की निर्माता डॉ मीनू पांडेय ने बताया की इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा उन्हें कोटा में बच्चों का दबाव ग्रस्त होकर जो घटनाएं हो रही है उन्होंने कहा बच्चों को समझें उसी अनुसार उनके केरियर को दिशा प्रदान करें उससे मिली आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन लगातार सामाजिक मुद्दों पर इस तरह की फिल्मों के माध्यम से जनजागरण करने के लिए कृतसंकल्पित है

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